गुरुवार, 11 जुलाई 2013

Civilizational Dialogue between India & ASEAN & Merging Metaphors






मंगलवार, 25 जून 2013

गया कला कार्यशाला की कुछ और तस्वीरें

कार्यशाला के प्रतिभागी कलाकार एवं छायाकार 

कार्यशाला का उद्घाटन करते मुख्य अतिथि 

कार्यशाला स्थल पर स्थित पीपल का महावृक्ष

सोमवार, 24 जून 2013

गया में कला कार्यशाला का शुभारम्भ

गया कार्यशाला में बनाई मीनाक्षी झा की चित्र 
 
             पिछले दिनों भवन निर्माण विभाग, बिहार एवं कला एवं संस्कृति विभाग, बिहार के संयुक्त तत्वावधान में  बिहार के प्राचीन धार्मिक पर्यटन स्थल गया  में सात दिवसीय कला कार्यशाला का शुभारम्भ हुआ। इसमे सात चित्रकार तथा सात फोटोग्राफर भाग ले रहे है।  इस कार्यशाला की विशेषता यह है की यह दो चरणों में होगा, तीन दिवसीय प्रथम चरण में सभी प्रतिभागी कलाकारों को गया के विभिन्न प्राचीन जगहों को दिखाया जाएगा फिर  गया में हीं रह कर एक चित्र बनाएँगे इसके बाद  कलाकारों को  ऎतिहसिक स्थल सीतामढ़ी ले जाया जाएगा जहाँ उन्हें वहां की विशेषताओ से रूबरू कराया जाएगा। यहाँ भी वे तीन दिनों तक रहकर एक चित्र बनाएँगे। साथ ही सभी फोटोग्राफर इन जगहों की ऎतिहसिक छवियों को अपने कैमरे में कैद करेंगे। कार्यशाला का समापन सीतामढ़ी में 29 जून को होगा। 

            इस कार्यशाला में चित्रकला के संचालक श्री अनिल कुमार सिन्हा है वे इसमे एक कलाकार के रूप में भी भाग ले रहे है । इनके अलावा चित्रकार के रूप में अशोक कुमार, मीनाक्षी झा बनर्जी, बबली दास, सुमन मेहता एवं मदन गोपाल भाग ले रहे है। वरिष्ठ कलाकार श्री सत्यनारायण लाल अपनी ख़राब सेहत की वजह से भाग नहीं ले पा रहे है। रजनीश कुमार राज फोटोग्राफी कार्यशाला के संयोजक हैं, इनके अलावा अजय रंजन , सुमन श्रीवास्तव, मुस्कान, ज्योति कुमारी, रवी शंकर साहनी एवं आलोक जैन  इस कार्यशाला में भाग लेने वाले छाया कलाकार है।        

बुधवार, 5 जून 2013

कलाकार राजीव रंजन का निधन

कलाकार रवीव रंजन 
          बिहार के कलाकार राजीव रंजन का कल दिल का दौरा पड़ने से दिल्ली से सटे वैशाली में निधन हो गया। वे 45  साल के थे तथा उत्तर प्रदेश के वैशाली में रह कर एक स्वतंत्र कलाकार के रूप में अपनी कला यात्रा को आगे बढ़ा रहे थे। पटना के मूल निवासी श्री राजीव रंजन 1993 में कला एवं शिल्प महाविद्द्यालय पटना से बी एफ ए की डिग्री लेने के बाद दिल्ली का रुख किया तथा कुछ महत्वपूर्ण प्रदर्शनियों में भाग लिया। हाल हीं में ललित कला अकादमी, दिल्ली में  रंग्पुर्वी नमक प्रदर्शनी में उनकी कलाकृति देखने को मिली थी।

आज शाम उनका दाह संस्कार किया जाएगा। 

राजीव अपनी पत्नी प्रेरणा झा के साथ 

राजीव रंजन अपनी कलाकृति के साथ 

अपने करीबी मित्रों के साथ राजीव 
          

रविवार, 28 अप्रैल 2013

बोध की कलाकृतियाँ



सूरज कुमार काशी की प्रयोगात्मक कला प्रदर्शनी

पानी जीवन है, पानी अमृत है, पानी ठोस भी है तरल भी, पानी जन्म भी है मरण भी, पानी मैल धोती है, पानी पाप धोती है। पानी के कई रूप हैं कई रंग हैं। जब इतने रूपों में पानी है तो ऐसे में कलाकार की कला में पानी क्यों न हो ?
सूरज कुमार काशी एक ऐसे हीं  कलाकार हैं जिनकी कला पिछले कुछ समय से लोगों के सर चढ़ कर बोल रही है। पिछले कुछ समय से इनकी कला प्रदर्शनी कई रूपों में देखने को मिली है। इसी क्रम में jaypee delcourt , ग्रेटर नॉएडा  में बिसलरी शीर्षक की प्रयोगात्मक प्रदर्शनी का आयोजन 1 8 मई से होने जा रहा हे।        

शनिवार, 27 अप्रैल 2013

संजीव सिन्हा की एकल कला प्रदर्शनी

 दिल्ली के india  habitate centre में 1 मई से जाने-माने समसामयिक  कलाकार संजीव सिन्हा की एकल कला प्रदर्शनी का  हो रहा है। काफी लम्बे समय के बाद श्री सिन्हा की एकल प्रदर्शनी लोगों को देखने को मिलेगी।      

सामूहिक कला प्रदर्शनी

कुमार रंजन की कृति 
दिल्ली के नेब सराए स्थित निव आर्ट सेंटर में आज से एक सामूहिक कला प्रदर्शनी की शुरुआत हो रही है। इस प्रदर्शनी में देश के 1 1 कलाकार अंजू कौशिक, चाँद डोलिया, देव गौड़, एम. गंगाधर, मो. ताहिर सिद्दीकी, रफीक शाह, रोहित सुपाकार, शिव शर्मा, सिद्धार्थ देबनाथ, सविता यादव एवं कुमार रंजन  की कृतियाँ प्रदर्शित की जाएगी।

आज 2 7 अप्रैल को इस प्रदर्शनी का उद्घाटन होगा जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में जानी -मानी मूर्तिकार गोगी सरोजपाल हिस्सा ले रहीं हैं। प्रदर्शनी 1 5 मई तक चलेगी।    

बुधवार, 24 अप्रैल 2013

त्रिभुवन कुमार की एकल कला प्रदर्शनी



दिनेश कुमार राम की एकल चित्र प्रदर्शनी

दिनेश कुमार राम की कृति 

             ज दिनेश कुमार राम का नाम कला की दुनिया में किसी से छुपा नहीं है। दिनेश एक स्वतंत्र कलाकार हैं और लम्बे समय से चित्र सृजन कर रहे हैं। इनके चित्र मन को छूने वाले तथा रंग हृदयस्पर्शी हैं। दिनेश एक ऐसे कलाकार हैं जो समय-समय पर अपनी कला के साथ अपने चाहने वालों के बिच आते रहते हैं,  इसी कड़ी में वे अपने चित्रों के साथ बहुत जल्द ही दिखने वाले हैं दिल्ली के ललित कला अकादमी की कला दीर्घा संख्या 4 में। "   प्रकृति का प्रवाह" यह शीर्षक है उनकी अगली प्रदर्शनी का जिसका उद्घाटन इसी महीने की 2 8 तारीख को ललित कला अकादमी के चेयरमैन श्री के. के. चक्रवर्ती करेंगे। प्रदर्शनी 4 मई तक चलेगी।

     

   

बुधवार, 17 अप्रैल 2013

त्रिभुवन कुमार की एकल कला प्रदर्शनी

त्रिभुवन कुमार एक ऐसे कलाकार हैं जिनकी कला को देखने से में भारत दर्शन का एहसास होता है। इनके चित्रों की एकल प्रदर्शनी दिल्ली के इंडिया हैबिटेट सेंटर में 2 2 अप्रैल से 2 5 अप्रैल तक होगी। 

  

प्रो. बिरेश्वर भट्टाचार्य के जीवन संग्रह के प्रकाशन की योजना

प्रो. बिरेश्वर भट्टाचार्य

           बिहार की कला की जब बात की जाए तो पटना कला महाविद्द्यालय का नाम खुद ही जुबां पर आ जाती है। यह महाविद्द्यालय  अपने आप में बहुत बड़ा इतिहास संजोए है। आज के दौर में कई युवा कलाकार देश में ही नहीं बल्कि विदेशो में भी अपनी कला का जौहर दिखा रहे है और इस महाविद्द्यालय की गरिमा बढ़ा रहे है परन्तु एक दौर ऐसा भी था जब यहाँ के शिक्षक भी देश-विदेश में विशेष पहचान बनाई थी, इसी दौर के एक बहुचर्चित कलाकार हैं, प्रो. बिरेश्वर भट्टाचार्य जो इन दिनों कोलकाता में रहकर कला सृजन कर रहे हैं। आज हम कितना भी आगे बढ़ जाएँ पर ऐसे वरिष्ठतम कलाकार की कला यात्रा को याद  रखना, उसे संभालना- संजोना भी हमारा ही काम है और यह बीड़ा उठाया है जाने-माने  वरिष्ठ कलाकार एवं कला लेखक श्री सुमन सिंह जी ने। 


प्रो. बिरेश्वर भट्टाचार्य कला सृजन में लीन 

             अपनी योजना के बारे में उन्होंने बताया की वे पटना के कुछ वरिष्ठतम कलाकारों के जीवन एवं उनकी कला यात्रा को संजोने के लिए पुस्तक के प्रकाशन की योजना बनाई है। इस क्रम की शुरुआत वे प्रो. बिरेश्वर भट्टाचार्य के जीवन संग्रह से कर रहे हैं। उन्होंने सभी कला प्रेमियों एवं कलाकारों से भी अपील की है की जो कुछ भी सामग्री, कला लेख या महत्वपूर्ण छायाचित्र उपलब्ध हैं प्रकाशनार्थ उपलब्ध कराएं ताकि वरिष्ठतम कलाकार की कला यात्रा को सम्मान पूर्वक सहेजा जा सके।

सोमवार, 18 मार्च 2013

रंगपुर्वी कला प्रदर्शनी- 2 0 1 3

 यूँ तो कला के लिए किसी भाषा की आवश्यकता नहीं है , बल्कि कला के बिना भाषा का कोई औचित्य नहीं।   कला खुद में एक सम्पूर्ण भाषा है जिसे समझने के लिए इसे सीखना जरुरी नहीं । 



आज दिल्ली के ललित कला अकादमी में एक ऐसी कला प्रदर्शनी का शुभारम्भ हुआ जिसका आयोजन दिल्ली सरकार की मैथिल-भोजपुरी अकादमी ने किया है। आज इसका उद्घाटन भाषा, शिक्षा, समाज कल्याण मंत्री प्रो. किरण वालिया ने किया। 

प्रदर्शनी में मैथिली एवं भोजपुरी भाषी प्रदेशों के करीब चालीस कलाकारों की कृतियाँ प्रदर्शित की गई है, जिनमे समकालीन कलाकारों के अलावा लोक कलाकारों की कृतियाँ भी शामिल हैं। 

लोक कलाकारों में शशिकला देवी, चानो देवी, जगदम्बा देवी आदि की कृतियाँ प्रमुख हैं वहीँ समकालीन कला के क्षेत्र में प्रो. श्याम शर्मा, अनिल कुमार सिन्हा, मिलन दास, नरेन्द्र पल सिंह, उमेश प्रसाद, राजेश चन्द, सचिन्द्र नाथ झा, सूरज कुमार कशी, राजेश राम, अभिजित पाठक, त्रिभुवन कुमार, नम्रता पंडित आदि कलाकार प्रमुख हैं। प्रदर्शनी 2 4 मार्च तक चलेगी।  

चित्र देखतीं माननीय मंत्री किरण वालिया 

इस अवसर पर एक सेमिनार का भी आयोजन किया गया जिसमे रविन्द्र कुमार दास, उमेश कुमार, रविन्द्र त्रिपाठी के साथ-साथ वरिष्ठ कलाकार अनिल सिन्हा ने भी अपनर विचार व्यक्त किए। 

सेमिनार में बोलते अनिल सिन्हा