गुरुवार, 22 जनवरी 2015

डच मानवविज्ञानी की एक मूर्ति की पोशाक पर पसीने को देखकर सिंगापुर के कलाकार को मिली प्रेरणा


बिनाले में प्रदर्शित सिंगापुर के कलाकार की कृति में सोच और हास्य का संगम है
कोच्चि, 22 जनवरी: हो रूई एन का जन्म सिंगापुर में हुआ था, लेकिन कोच्चि - मुजिरिस बिनाले (केएमबी) में प्रदर्शित उनकी कृतियों में सूर्य और पसीने को देखकर ऐसा मानना गलत होगा कि इस नौजवान का लगाव उष्णकटिबंधीय द्वीप के गर्म और आर्द्र जलवायु से होगा।
Ho Rui An
24 वर्षीय कलाकार कहते हैं, कि कोच्चि में चल रहे बिनाले 2014 में उनकी कृतियां और उनका व्याख्यान वैसी छवि पर आधारित है जिसे उन्होंने स्वास्थ्यप्रद आबोहवा के लिए प्रसिद्ध नीदरलैंड की राजधानी में पुरातात्विक संग्रह में बहुत ही खराब हालत में रखी देखी थी। एम्स्टर्डम के ट्रोपेन संग्रहालय में, छाटे से कद के हो रूई एन का सामना भारी कद काठी के डच मानव विज्ञानी चार्ल्स ली रॉक्स की एक मूर्ति से हुआ था।
उस दृष्य ने हो को प्रेरित किया। वह ली राॅक्स (1885-1947) की इस मूर्ति के पसीने से काफी मोहित हो गये। आज, अमेरिका और अपने देश दोनों जगह समय बिताने वाले वाले सिंगापुर निवासी, एक ऐसे वीडियो को लेकर आये हैं जो दार्शनिक की गहराई को नौजवान के विचित्र हास्य के साथ जोड़ती है।
उनकी कृति ‘सन, स्वीट, सोलर क्वींस: ऐन एक्सपेडिशन’ में उपनिवेशवाद के इतिहास को चित्रित किया गया है
जबकि फार्टे  कोच्चि में मुख्य प्रदर्शनी स्थल - एस्पिनवाल हाउस में प्रदर्शित यह कलाकृति उन कलाकृतियों में से हैं जो दर्शकों को गहराई से विचार करने के लिए मजबूर करती है।
कलाकृति के एक हिस्से में ली राॅक्स की प्रतिमा की तस्वीर है जिसे हो ने 1864 में स्थापित ट्रोपेन संग्रहालय में देखा था। हो उस मानव विज्ञानी के बारे में गहराई से जानना चाहते थे जिन्होंने 20 वीं शताब्दी के शुरूआत में डच ईस्ट इंडीज में फील्ड वर्क किया था। हो ने उत्सुकतावश ध्यान से देखा कि प्रतिमा ने खुद को काम में व्यस्त रखा है और उसकी कमीज का पिछला हिस्सा पसीने में भीगा हुआ है। यही कारण है कि यह कलाकृति यहां बिनाले में उनकी कलाकृतियों में विशेष कलाकृति बन गयी।
सिंगापुर निवासी, जो कि एक लेखक भी हैं, कहते हैं, ‘‘मेरे लिये नया मुद्दा ली रॉक्स की कमीज पर पसीना था। इसने मुझे ‘अपने साम्राज्य में सूरज’ और अभियान के काल के बारे में सोचने पर मजबूर किया। यह अज्ञात में प्रवेश करने की इच्छा रखने वाले लोगों को अदृश्य महसूस करने की तुलना में कहीं अधिक देता है। पसीना साम्राज्य के भीतर श्रम और रिश्तों के लिए एक महत्वपूर्ण सूचक बन जाता है।’’
A visitor at the installation Sun, Sweat, Solar, Queens
An Expedition of Artist Ho Rui An on display at Aspinwall House,
the main venue of Kochi Muziris Biennale 2014.
इसके अलावा पिछले महीने के एम बी’14 में उद्घाटन सप्ताह में हो के द्वारा दिया गया भाषण का वीडियो प्रोजेक्शन भी है। इस भाषण में फिल्मी और डाॅक्युमेंट्री क्लिप्स भी हैं जो भूमंडलीकरण के खिलाफ ‘वैष्विक स्वदेशी ’’ तथा ‘वैष्विक विस्थापन की दुनिया’ की व्याख्या करता है।
महारानी एलिजाबेथ द्वितीय की छोटी मूर्ति हो या हो के ‘सोलर क्विन’, फोटोग्राफ और वीडियो इनसे इस तरह से जुड़े हैं, कि ये सौर पैनल द्वारा संचालित भव्य लहर पैदा करते हैं। कलाकार कहते हैं कि इस पैनल को ‘अपनी
पीठ की बजाय बैग में रखा गया’ है।
हो कहते हैं, ‘‘मेरी कलाकृति दुनिया को खोलती है।’’ हो केएमबी’14 के क्यूरेटर जितिश कलात से पहली बार लंदन के गोल्ड स्मिथ काॅलेज में छात्र के रूप में मिले थे और उसके बाद न्यूयार्क में मिले, जहां उन्होनें अपनी पढ़ाई जारी रखी। हो कहते हैं, ‘‘इनमें तनाव और विरोधाभास है और मेरी कृतियां इन राजनीतियों के साथ समाधान करने का रास्ता चुनती हैं।’’
पसीने के मूल भाव को ध्यान में रखते हुए, हो अपनी बातचीत को उस दौर में ले जाते हैं जब उन्होंने रानी को उनकी डायमंड जुबली समाराहे में देखा था और उनके बारे में उनका भ्रम टूट गया। वह जोर से हंसते हुए कहते हैं, कि भीड़ से गुजरकर आने और उसके बाद टेम्स नदी की ओर जाती नाव में वापस लौटते समय एक सेकंड से कम समय के लिए, मैंने उनके पसीने से तर पीठ को देखा था।
Artist Ho Rui An describing his installation to a gathering at Aspinwall House,
the main venue of Kochi Muziris Biennale 2014.
हो कहते हैं कि उनके कार्य में इतिहास के एक तत्व ने उनके पहले बिनाले में होने और क्षत्रेमें इतना ज्यादा इतिहास को देखने को उनके लिए रोमांचक बना दिया।
जर्मनी से अपने पति के साथ आयी मेलानी पेलजर कहती हैं, ‘‘हो के काम की सामाजिक और दार्शनिक गहराई को अनुभव करना अच्छा है। मैं बिनाले को इसलिए पसंद करती हूँ क्योंकि यह आपको सोचने का मौका देता है।’’
कलात कहते हैं कि हो की कृतियां उस चैराहे पर पड़ी हैं जहां सिनेमा, प्रदर्शन, कथन और सिद्धांत मिलते हैं। वह कहते हैं, ‘‘के एम बी में उनका प्रदर्शन व्याख्यान कल्पना, अंतर्दृष्टि और विडंबना के कल्पना और विचारों से भरा है।’’

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