मंगलवार, 3 अप्रैल 2012

बिहार के कलाकारों ने दर्ज कराई अपनी नाराजगी

       नई दिल्ली,  बिहार कला के क्षेत्र में सदियों से अग्रणी रहा है / यहाँ की शिल्प कला हो या लोक कला, यहाँ की वास्तु कला या फिर आधुनिक कला, सभी में यहाँ के कलाकारों ने अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है पर आज के समय में इसे काफी उपेक्षा का सामना करना पड़ रहा है / भारतीय कला के समुचित विकास के लिए भारत सरकार ने राष्ट्रीय ललित कला अकादमी की स्थापना की / राष्ट्रीय ललित कला अकादमी इसके लिए अनेक कार्यक्रमों के साथ-साथ प्रति वर्ष राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी का आयोजन कराती है / यह प्रदर्शनी हर साल देश के अलग-अलग प्रदेशों में करने का प्रावधान है /

अपनी नाराजगी व्यक्त कराने के लिए विचार-विमर्श करते कलाकार  
       चुकी इस वर्ष बिहार अपना १०० वाँ सालगिरह मना रहा है और बिहार सरकार कला के विकास एवं कलाकारों के प्रोत्साहन के लिए कई कला कार्यक्रमों का आयोजन कर रही है , इस लिए बिहार सरकार ने राष्ट्रीय ललित कला अकादमी के सामने यह प्रस्ताव रखा था की इस वर्ष होने वाला ५४ वीं राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी का आयोजन बिहार ( पटना ) में किया जाय / ललित कला अकादमी इसे अपनी मंजूरी देने के साथ-साथ कार्यक्रम की रूप- रेखा एवं बजट भी पास कर चूका था / फिर अचानक बिना कोई कारण बताए इस प्रदर्शनी का स्थान परिवर्तित कर बैंगलोर कर दिया गया जबकि बिहार सरकार ने इसके लिए हर सहयोग का वादा किया था / अकादमी के इस रवैये को बिहार के कलाकार अपना अपमान मान रहे हैं /


        अकादमी के निर्वाचित सदस्य श्री श्रीकांत पाण्डेय एवं अमिताभ भौमिक के नेतृत्व में कलाकारों का एक समूह अपना विरोध दर्ज कराने अकादमी पहुंची तथा सचिव एवं अध्यक्ष (राष्ट्रीय ललित कला अकादमी)  को  अपना हस्ताक्षर युक्त ज्ञापन सौंपा  /

     
        

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