शनिवार, 28 अप्रैल 2012

सामूहिक कला प्रदर्शनी

           कला एक माध्यम  है अपनी बातों को दूसरों तक पहुँचाने का / जब इंसानों के पास अर्थपूर्ण शब्द नहीं थे तब  रेखाचित्र हीं एक जरिया था परस्पर संवाद का / तब है की उन दिनों कला जैसे कोई शब्द नहीं थे चित्रों का निर्माण हमारी जरुरत थी शौक नहीं / जब हमने शब्द गढ़ लिए आपसी संवाद के लिए आसन तरीका चुन लिया तब इन  रेखाचित्रों को जटिल  एवं सुन्दर बनाने लगे और इसे हमने कला का नाम  दिया  / तब से आज तक इस  क्षेत्र में लगातार प्रयोग  होते रहे हैं  /  आज के समय में कला एक जरिया है अपने पूर्वजों से संवाद करने का उनसे मानसिक रूप से जुड़ने का / इन्हीं भावनाओं से प्रेरित होकर कलाकार कला सृजन करता है /

           दिल्ली की ललित कला अकादमी ने कलाकारों की कृतियों को प्रदर्शित करने के उद्देश्य से कला दीर्घा का निर्माण किया है जहाँ देश विदेश के कलाकार अपनी कला का प्रदर्शन करते हैं/ इन दिनों यहाँ देश के जाने-माने कला समीक्षक एवं कलाकार श्री वेदप्रकाश भारद्द्वाज ने एक सामूहिक कला प्रदर्शनी का आयोजन किया है / इस प्रदर्शनी में देश के विभिन्न भागों से ८ कलाकारों की कलाकृतियाँ प्रदर्शित की गई है / अजय उपासनी, अर्चना यादव, अशोक भंडारी, रविन्द्र कुमार दास, संजू दास,  के साथ-साथ  वी. पी. भरद्वाज की चित्र  कृतिया तथा दिनेश पाल एवं  एस . एल . बाथम की मूर्ति शिल्प  प्रदर्शित है /  प्रदर्शनी की सुरुआत २३ अप्रैल को हुआ , सात दिनों की इस प्रदर्शनी का समापन २९ अप्रैल को होगा / 
               
             
           

सोमवार, 16 अप्रैल 2012

अनुप बिहारी की एकल चित्र प्रदर्शनी

             बिहार की कला की जब बात आती है तो कुछ नाम जैसे सुबोध गुप्ता, संजीव सिन्हा, अशोक कुमार, संजय कुमार,  शाम्भवी, श्रीकांत पाण्डेय आदि नाम ही लिया जाता है , पर यहाँ  के युवा  कलाकारों ने भी अपनी अलग पहचान बनाई है जिनमे कई नाम महत्वपूर्ण हैं अरुण पंडित, राजेश राम, सचिन्द्र नाथ झा, संजीव श्रीवास्तव, राजेश श्रीवास्तव आदि नाम प्रमुख हैं   /
अनूप बिहारी की कृति

          कुछ कलाकार ऐसे भी हैं जो अभी इस दौड़ में शामिल होने के लिए अपनी योग्यता साबित करने में लगे हैं  / ऐसे ही एक कलाकार है  अनूप बिहारी  / जिनकी एकल प्रदर्शनी दिल्ली के ललित कला अकादमी में चल रही है जिसका शुभारम्भ इसी महीने की १५ तारीख को हुआ / इस प्रदर्शनी में अनूप ने अपने मूर्ति शिल्प के साथ-साथ चित्र  भी प्रदर्शित किए हैं / यह प्रदर्शनी २१ अप्रैल तक चलेगी / 

रविवार, 15 अप्रैल 2012

मंगलवार, 3 अप्रैल 2012

बिहार के कलाकारों ने दर्ज कराई अपनी नाराजगी

       नई दिल्ली,  बिहार कला के क्षेत्र में सदियों से अग्रणी रहा है / यहाँ की शिल्प कला हो या लोक कला, यहाँ की वास्तु कला या फिर आधुनिक कला, सभी में यहाँ के कलाकारों ने अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है पर आज के समय में इसे काफी उपेक्षा का सामना करना पड़ रहा है / भारतीय कला के समुचित विकास के लिए भारत सरकार ने राष्ट्रीय ललित कला अकादमी की स्थापना की / राष्ट्रीय ललित कला अकादमी इसके लिए अनेक कार्यक्रमों के साथ-साथ प्रति वर्ष राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी का आयोजन कराती है / यह प्रदर्शनी हर साल देश के अलग-अलग प्रदेशों में करने का प्रावधान है /

अपनी नाराजगी व्यक्त कराने के लिए विचार-विमर्श करते कलाकार  
       चुकी इस वर्ष बिहार अपना १०० वाँ सालगिरह मना रहा है और बिहार सरकार कला के विकास एवं कलाकारों के प्रोत्साहन के लिए कई कला कार्यक्रमों का आयोजन कर रही है , इस लिए बिहार सरकार ने राष्ट्रीय ललित कला अकादमी के सामने यह प्रस्ताव रखा था की इस वर्ष होने वाला ५४ वीं राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी का आयोजन बिहार ( पटना ) में किया जाय / ललित कला अकादमी इसे अपनी मंजूरी देने के साथ-साथ कार्यक्रम की रूप- रेखा एवं बजट भी पास कर चूका था / फिर अचानक बिना कोई कारण बताए इस प्रदर्शनी का स्थान परिवर्तित कर बैंगलोर कर दिया गया जबकि बिहार सरकार ने इसके लिए हर सहयोग का वादा किया था / अकादमी के इस रवैये को बिहार के कलाकार अपना अपमान मान रहे हैं /


        अकादमी के निर्वाचित सदस्य श्री श्रीकांत पाण्डेय एवं अमिताभ भौमिक के नेतृत्व में कलाकारों का एक समूह अपना विरोध दर्ज कराने अकादमी पहुंची तथा सचिव एवं अध्यक्ष (राष्ट्रीय ललित कला अकादमी)  को  अपना हस्ताक्षर युक्त ज्ञापन सौंपा  /

     
        

रविवार, 1 अप्रैल 2012

विलुप्त होती बिहार की प्राचीन कला पर दो दिवसीय चर्चा का आयोजन

बिहार सदियों से कला का गढ़ रहा है / यहाँ की कला एवं संस्कृति पूरी दुनिया में अपनी अलग पहचान रखती है / यहाँ की प्राचीन कला पटना कलम हो या सिक्की कला , गोदना हो या मधुबनी चित्र सभी को दुनिया भर में बड़े हीं सम्मान के साथ जाना जाता है/ पर कुछ समय से यह अपने हीं घर में उपेक्षा का सामना कर रहा है / कुछ तो विलुप्त हो चुके हैं तथा कुछ विलुप्ति के कगार पर हैं / इन्ही विषयों पर दो दिवसीय चर्चा का आयोजन स्थानीय संस्था ज्ञानकिरण के तत्वावधान में पटना के IIBM हौल में किया गया / ३० एवं ३१ मार्च , २०१२ को आयोजित इस चर्चा में श्री ज्योतिष जोशी, श्री श्याम शर्मा , अनिल कुमार सिन्हा , अवधेश अमन आदि वक्ताओं ने अपने विचारों से श्रोताओं को अवगत कराया /

शुक्रवार, 23 मार्च 2012

कला विमर्श

वरिष्ठ कलाकार अनिल सिन्हा  

        ललित कला अकादमी के भुवनेश्वर रीजनल सेंटर द्वारा २६ मार्च २०१२ को रांची स्थित बिहार क्लब में एक कला  परिचर्चा का आयोजन किया गया है / बिहार और झारखण्ड की समसामयिक कला विषय पर आयोजित इस कला परिचर्चा में बिहार के जाने-माने वरिष्ठ कलाकार श्री अनिल सिन्हा अपने अनुभवों से लोगों को परिचय कराएँगे /  इस कार्यक्रम का संचालन झारखण्ड के वरिष्ठ कलाकार श्री हरेन ठाकुर करेंगे /

शुक्रवार, 2 मार्च 2012

Rejoicing in Artistic Extensions" सामूहिक कला प्रदर्शनी

2  मार्च २०१२, ( मुंबई ) आज मुंबई के कुमारस्वामी हॉल में करीब ३६ कलाकारों की सामूहिक कला प्रदर्शनी का उद्घाटन हुआ /  "   Rejoicing in Artistic Extensions"  शीर्षक की इस प्रदर्शनी में रागिनी सिन्हा, असुर्वेध , जे. पी. सिंह, राम चन्द्र पोकले, बिपिन मार्था, सुरेश कुमार, प्रसून चक्रवर्ती के साथ-साथ कई कलाकारों की कलाकृतियाँ प्रदर्शित हैं /  प्रदर्शनी का समापन ६ मार्च को होगा /    

बुधवार, 1 फ़रवरी 2012

राष्ट्रीय सामूहिक कला प्रदर्शनी शुरू

            १ फरवरी २०१२, आज राजधानी दिल्ली के अर्पना आर्ट गैलरी में राष्ट्रीय सामूहिक कला प्रदर्शनी की शुरूआत हुई / प्रदर्शनी का उद्घाटन पद्मश्री से सम्मानित प्रख्यात मूर्तिकार श्री राम वी. सुतार ने दीप प्रज्वलित कर किया / इस अवसर पर श्री सुतार जी ने प्रदर्शनी की संयोजिका सुश्री शालिनी सच की तारीफ करते हुए कहा की इस आयोजन में सम्पूर्ण भारत से कलाकारों को इक्कठा कर उनके चित्रों को सफलता पूर्वक प्रदर्शित करना शालिनी के निष्ठा और जुझारूपन को दिखता है / इस अवसर पर वरिष्ठ चित्रकार श्री उमेश वर्मा एवं प्रख्यात चित्रकार अर्पना कौर भी उपस्थित थी /
प्रतिभागी कलाकारों के साथ श्री राम वी. सुतार 
          ४ फरवरी तक चलने वाली इस प्रदर्शनी में अलग-अलग प्रदेशों से आए कुल १८ चित्रकारों की करीब ४० कलाकृतियाँ प्रदर्शित की गई हैं / प्रदर्शनी में अवधेश कुमार मिश्र, आनंद जायसवाल, अभिजित सिन्हा, दिव्या पाण्डेय, ज्ञानेश शुक्ला , हरी कृष्ण कदम , इश्वर चंद, कामिनी भगेल, किशोर चंद, महेश्वर दास, पूनम यादव, पुष्पा सिंह, प्रमोद यादव, राजेश चंद, रमेश थोराट, ऋचा कम्बोज, सिमचालम डी, शालिनी सच के चित्र प्रदर्शित हैं /   

शुक्रवार, 27 जनवरी 2012

कला एवं शिल्प महाविद्यालय पटना में स्थाई शिक्षक बहाल

      २७ जनवरी २०१२,  लम्बे अरसे से यह मांग की जा रही थी कि कला महाविद्द्यालय पटना में कला शिक्षकों को स्थाई रूप से बहाल किया जाए ताकि यहाँ के विद्द्यार्थियों को समुचित शिक्षा मिल सके /  यहाँ के विद्द्यार्थियों एवं स्थानीय कलाकारों के पुरज़ोर दबाव का ही नतीजा है कि आज करीब २० वर्षों के बाद कला एवं शिल्प महाविद्यालय पटना में स्थाई शिक्षक बहाल किये गए हैं / प्राचार्य के साथ-साथ करीब ग्यारह शिक्षकों का पद रिक्त था जिनमे नौ शिक्षकों कि नियुक्ति कर दी गई है, दो शिक्षक एवं प्राचार्य कि नियुक्ति उपयुक्त मापदंड  नहीं मिलाने के कारण नहीं कि गई है जिनका विज्ञापन बाद में प्रकाशित किया जाएगा  / 

समारोह में नव नियुक्त शिक्षक
नियुक्त शिक्षक इस प्रकार हैं:-      * ग्राफिक्स- सुजय मुखर्जी , राखी कुमारी /   * पेंटिंग- चन्द्रभूसन श्रीवास्तव , रीता शर्मा  / * मूर्तिकला -अजय कुमार  पाण्डेय , एक पद रिक्त / * व्यवसायिक कला - अविनाश दास, शशि रंजन प्रकाश / * फोटोग्राफी - मज़हर इलाही / * कला इतिहास - उमेश कुमार सिंह, एक पद रिक्त  

 



गुरुवार, 26 जनवरी 2012

इंडिया आर्ट फेयर का भव्य शुभारम्भ


२५ जनवरी २०१२, नई दिल्ली , आज इंडिया आर्ट फेयर का भव्य शुभारम्भ नई दिल्ली के एन. एस. आई. सी. एग्जीविशन ग्राउंड , नई दिल्ली में भव्य कार्यक्रम के साथ शुरू हो गया / इस मेले में देश के साथ-साथ विदेशी कला दीर्घाओं एवं कलाकारों की अच्छी भागीदारी कला प्रेमियों को देखने को मिल रही है / करीब १०० कला दीर्घाओं ने इस मेले मी सिरकत की है जिनमे 1x1 Art gallery, Aicon Gallery, Archer Gallery, Art Alive, Art Konsult, Exhibit 320, Gallerie Beatrice Binoche, Gallerie Nvya', Gallery Sumukha, 
Palette Art Gallery, Religare Art, आदि प्रमुख कला दीर्घा प्रमुख हैं / यह मेला  २९ जनवरी तक दर्शकों के लिए खुली रहेगी /   

सुबोध गुप्ता की कृति
 

मंगलवार, 24 जनवरी 2012

राष्ट्रीय ललित कला अकादमी के अध्यक्ष बने बालन नाम्बियार

२४ जनवरी, नई दिल्ली, दिल्ली की राष्ट्रीय ललित कला अकादमी के अध्यक्ष के रूप में  श्री बालन नाम्बियार ने  पद संभल लिया है / कुछ हीं दिनों पहले श्री अशोक वाजपेई  इस पद से अवकाश ग्रहण कर चुके हैं  / श्री नाम्बियार कला पारखी के साथ-साथ एक अच्छे मेटल मूर्तिकार हैं और कला जगत में उनसे काफी उम्मीद है / आर्ट ऑफ़ बिहार की ओर से बहुत-बहुत बधाई /

सोमवार, 23 जनवरी 2012

प्रो. श्याम शर्मा की एकल चित्रकला प्रदर्शनी

        २४ जनवरी २०१२, नई दिल्ली, बिहार के जाने-माने छपा कलाकार प्रो. श्याम शर्मा की छपा कला से पूरा भारत वर्ष परिचित है / उन्होंने चित्रकला में भी काफी काम किया है / इन्हीं  चित्रों को करीब से देखने का मौका मिलेगा उनकी एकल चित्र प्रदर्शनी में कला प्रेमियों को / नवगठित कला संस्था " संरचना " के तत्वावधान में दिनांक ४ फरवरी से पटना के कला एवं शिल्प महाविद्यालय में  इस प्रदर्शनी का शुभारम्भ हो रहा है /



बुधवार, 18 जनवरी 2012

मुखौटों में समाई कलाकारों की कल्पना


          विगत दिनों दिल्ली के ललित कला अकादमी में मुखौटो पर ३०० कलाकारों द्वारा बनाई गई कलाकृतियों की एक भव्य प्रदर्शनी का आयोजन किया गया / कई मायने में सफल इस प्रदर्शनी का पुनरायोजन ३१२, सेक्टर -१५ A ,  नोयडा के अर्बन कला दीर्घा में २० जनवरी २०१२ से किया जा रहा है / यह प्रदर्शनी ५ फरवरी तक चलेगी / नव सिद्धार्थ आर्ट ग्रुप द्वारा आयोजित इस प्रदर्शनी में नए कलाकारों के साथ-साथ कई ख्याति प्राप्त वरिष्ठ कलाकारों की कृतियाँ भी प्रदर्शित की जा रही है /

           आपको पता हीं होगा की इस प्रदर्शनी का प्रथम आयोजन ललित कला अकादमी, नई दिल्ली में १ जनवरी से ५ जनवरी २०१२ तक बहुत हीं सफलता पूर्वक किया गया था / इस प्रदर्शनी की खासियत यही थी की पहले ग्रुप द्वारा फाइबर माध्यम में १ फिट x १ फिट की  लगभग ३५० मुखौटे  तैयार कर  देश भर में करीब ३०० कलाकारों को वितरित की गई,  इन मुखौटों पर सभी कलाकारों ने अपने-अपने तरीके से बड़े हीं सुन्दर तरीके से चित्र उकेरे थे /
ललित कला अकादमी, नई दिल्ली  में आयोजित प्रदर्शनी 

           ग्रुप के अध्यक्ष असुर्वेध के अनुसार इस प्रदर्शनी का आयोजन देश में तथा देश के बहार विभिन्न कला दीर्घाओं में प्रदर्शित किया जाएगा / नोएडा के बाद भोपाल के भारत भवन में १३ फरवरी से  इस प्रदर्शनी का आयोजन किया जाएगा / इसके अलावा देहरादून, पटना के साथ-साथ इटली में भी इसके प्रदर्शन की योजना है /

मंगलवार, 27 दिसंबर 2011

आर्ट मॉल में गजल संग बिखरी रंगों की छटा

२६ दिसंबर, २०११, नई दिल्ली, रंग और राग अपनी अभिव्यक्ति को लोगों तक पहुँचाने एवं रसिकों के दिलों में उतरने का सशख्त  माध्यम है / रंग जहाँ आँखों को तृप्त करती है वहीँ राग कानों को / दोनों इन्द्रियां माध्यम है रंग और राग की कलामक्ता को दिल तक पहुँचाने का /
उद्घाटन अवसर पर मो. गुलाम अब्बास खान का ग़ज़ल गायकी

आज दिल्ली के मोती नगर स्थित आर्ट मॉल में कुछ ऐसा ही नजारा था , मौका था तीस कलाकारों की सामूहिक कला प्रदर्शनी के उद्घाटन अवसर का / प्रदर्शनी का उद्घाटन जाने-माने वरिष्ठ कलाकार श्री आनंद देव ने दीप जलाकर किया / इस अवसर पर शास्त्रीय गजल गायक  मो. गुलाम अब्बास खान ने अपनी गजल गायकी से उपस्थित श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया /
कला संस्था "वंदना" द्वारा आयोजित इस कला प्रदर्शनी कुल तीस कलाकारों की कलाकृतियाँ प्रदर्शित की गई है , जिनमे भुनेश्वर भास्कर, मनीष उपाध्याय , रीना सिंह, कुमकुम मल्लिक , रंजन मल्लिक, अंजनी प्रसाद तथा शशिकांत कुमार  की कलाकृतियाँ प्रमुख हैं /
भुनेश्वर भास्कर की कृति

यह प्रदर्शनी तीस दिसंबर तक चलेगी/
प्रदर्शनी की एक झलक
 

गुरुवार, 8 दिसंबर 2011

मिट्टी की खुशबू के साथ प्रेम का रसास्वादन कराती सामूहिक कला प्रदर्शनी


इंडिया हैबिटेट सेंटर, नई दिल्ली में इन दिनों चित्रकार रविन्द्र दास , संजू दास एवं विजय कॉल की चित्र प्रदर्शनी चल रही है / ९ दिसंबर तक चलने वाली इस प्रदर्शनी का उद्घाटन ५ दिसंबर को हुआ / इस प्रदर्शनी में संजू दास के चित्रों में गांवो की हरियाली एवं वहां के वातावरण को बड़े ही सुन्दर तरीके से दिखाया गया है वहीं रविन्द्र दास के चित्रों में प्यार के मुधुर पलो को समेटने का प्रयास है /

शुक्रवार, 2 दिसंबर 2011

सचिव बनने पर हार्दिक बधाई

नए सचिव ज्योतिष जोशी 
      २ दिसंबर , नई दिल्ली , आज प्रख्यात लेखक एवं कला समीक्षक  ज्योतिष जोशी को राष्ट्रीय ललित कला अकादमी , नई दिल्ली का  सचिव बना दिया गया / सचिव बनने पर  हार्दिक बधाई .

मंगलवार, 22 नवंबर 2011

बिहार के हस्तशिल्प पर सेमिनार

स्लाइड शो द्वारा  अर्पणा कौर अपनी बातों को रखते हुए
          नई दिल्ली, 22 नवम्बर 2011 , आज प्रगति मैदान, नई दिल्ली के हौल न. 8 के सभागार में उपेन्द्र महारथी अनुसंधान संस्थान , पटना द्वारा एक सेमिनार का आयोजन किया गया, विषय था " बिहार का हस्तशिल्प " / इस सेमिनार में प्रतिष्ठित कला समीक्षक विनोद भरद्वाज, चर्चित मूर्तिकार अमरेश कुमार, सुप्रसिद्ध चक्षुस कलाकार अर्पणा कौर एवं युवा चित्रकार भुनेश्वर भास्कर ने उक्त विषय पर अपने विचार रखे / सेमिनार में स्लाइड शो द्वारा भी बिहार की हस्तशिल्प को प्रदर्शित किया गया /  

सोमवार, 21 नवंबर 2011

कौशलेश की एकल चित्र प्रदर्शनी

कलाकार  कौशलेश कुमार 
कौशलेश की एकल चित्र प्रदर्शनी 
"हार्ट टू हार्डवेयर "

          युवा कलाकारों की अगर हम बात करे तो एक बहुत ही प्रभावशाली कलाकार है कौशलेश कुमार   / इनकी एकल चित्र प्रदर्शनी "हार्ट टू हार्डवेयर " त्रिवेणी कला दीर्घा , नई दिल्ली में 24  नवम्बर से होने जा रही है / 4 दिसंबर तक चलने वाली इस प्रदर्शनी का उद्घाटन पद्मश्री से सम्मानित, जाने-माने वरिष्ठ कला समीक्षक श्री केशव मल्लिक करेंगे / कला एवं शिल्प महाविद्यालय, लखनऊ से M .V . A  .   की डिग्री प्राप्त कौशलेश ने इस प्रदर्शनी को इस महाविद्यालय के 100 वे वर्ष पूरा होने पर समर्पित किया है /

          कौशलेश ने विगत दिनों इस प्रदर्शनी का पुवालोकन एवं कैटलौग का लोकार्पण अपने जन्म स्थान  "आरा " के इन्द्रलोक उत्सव  भवन में किया / इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में श्री राम बिहाल गुंजन के अलावा कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे /


आरा में कैटलौग का लोकार्पण
           आरा में जन्मे कौशलेश ने कला की शिक्षा B .F . A . कशी हिन्दू विश्वविद्द्यालय तथा M . V . A .  कला एवं शिल्प महाविद्द्यालय, लखनऊ से प्राप्त की है / अमूर्त आकारों एवं बहुत ही हलके रंगों के प्रयोग से बने इनके चित्र एक मायावी एहसास दिलाती है / मिश्रित माध्यम में बने इनके चित्रों में एक सुकून है, रंगों में अजीब सी मुलायमता है जो आखों को सुखद एहसास दिलाती है /

           प्रदर्शनी के कैटलौग में वरिष्ठ कला समीक्षक श्री केशव मल्लिक ने अपनी साक्षा लिखी है जोइस प्रकार है :- 


HEART TO HARDWARE

           Something with may at pinch be named Zen peace appears to pervade the mixed media on canvas works of Kaushlesh Kumar of Ara, Bihar (India). While Many of the objects represented in his picture space are workaday, or commonplace, he tackles them in such a manner that they become tamed, not the normal brusque hardware of a savagely industrial world. So that if we perforce have to live in a useful but heartless environment, the artist tries to take the corroding acid out of it.

           The work is distinguished by the old time Japanese simplicity of form. The execution is commendable enough, with soft slate or other understated hues to most of the compositions. Among these I would name the School & Untitled series as affording balm to city-sore eyes.

           The painter’s work combines new methods with the spirit of suave, traditional art, and the results can be thus rewarding. There is hardly any work in the show which fails to elicit some interest. And this without being `modern’ or `traditional’.

           Finally, over here is observed the beginning of a career prompted by the heart… that is say art… and if one wishes the painter anything, it is of course that his heart remains sound; that his health of spirit stands by him till the last. Admittedly a difficult proposition in these times. But what else can we humans do but strongly wish!


Keshav Malik
(An Eminent Art Critic)
New Delhi, India

शुक्रवार, 18 नवंबर 2011

Ashok Kumar in International Biennale Artist Exhibition

             कला एवं शिल्प महाविद्द्यालय , पटना से स्नातक अशोक कुमार कला की राजनीति से दूर अपनी अलग पहचान बनाने वाले कर्मठ कलाकारों में शामिल है / अशोक कुमार एक ऐसा नाम है जिनकी कला केवल भारत वर्ष में ही नहीं बल्कि देश के बहार भी काफी सराही गई है / यही कारण है कि आज उनकी कृति (पेन्टिंग) को  LuminArte Gallery द्वारा आयोजित International Biennale Artist Exhibitaon में भारत का प्रतिनिधित्व करने का मौका मिला है /   5  नवम्बर से शुरू इस प्रदर्शनी में 17 देशों के 42 समसामयिक कलाकारों को चुना गया है / इस प्रदर्शनी में भारत के अलावा ऑस्ट्रिया , कनाडा, चीन, कोलम्बिया, फिनलैण्ड, इरान, इसराइल, लिथुआनिया, मैक्सिको, मोरक्को, पेरू, रोमानिया, स्वीडेन , टर्की ,  यु. एस. ए. तथा वेनेजुएला के कलाकारों को अपनी कला का प्रदर्शन करने का मौका मिला है / यह प्रदर्शनी 11 दिसंबर तक   LuminArt FineArt Gallery 1727 E Levee St, Dallas ,Tx में  चलेगी /