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| स्लाइड शो द्वारा अर्पणा कौर अपनी बातों को रखते हुए |
मंगलवार, 22 नवंबर 2011
बिहार के हस्तशिल्प पर सेमिनार
सोमवार, 21 नवंबर 2011
कौशलेश की एकल चित्र प्रदर्शनी
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| कलाकार कौशलेश कुमार |
कौशलेश की एकल चित्र प्रदर्शनी
"हार्ट टू हार्डवेयर "
युवा कलाकारों की अगर हम बात करे तो एक बहुत ही प्रभावशाली कलाकार है कौशलेश कुमार / इनकी एकल चित्र प्रदर्शनी "हार्ट टू हार्डवेयर " त्रिवेणी कला दीर्घा , नई दिल्ली में 24 नवम्बर से होने जा रही है / 4 दिसंबर तक चलने वाली इस प्रदर्शनी का उद्घाटन पद्मश्री से सम्मानित, जाने-माने वरिष्ठ कला समीक्षक श्री केशव मल्लिक करेंगे / कला एवं शिल्प महाविद्यालय, लखनऊ से M .V . A . की डिग्री प्राप्त कौशलेश ने इस प्रदर्शनी को इस महाविद्यालय के 100 वे वर्ष पूरा होने पर समर्पित किया है /
कौशलेश ने विगत दिनों इस प्रदर्शनी का पुवालोकन एवं कैटलौग का लोकार्पण अपने जन्म स्थान "आरा " के इन्द्रलोक उत्सव भवन में किया / इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में श्री राम बिहाल गुंजन के अलावा कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे /
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| आरा में कैटलौग का लोकार्पण |
प्रदर्शनी के कैटलौग में वरिष्ठ कला समीक्षक श्री केशव मल्लिक ने अपनी साक्षा लिखी है जोइस प्रकार है :-
HEART TO HARDWARE
Something with may at pinch be named Zen peace appears to pervade the mixed media on canvas works of Kaushlesh Kumar of Ara, Bihar (India). While Many of the objects represented in his picture space are workaday, or commonplace, he tackles them in such a manner that they become tamed, not the normal brusque hardware of a savagely industrial world. So that if we perforce have to live in a useful but heartless environment, the artist tries to take the corroding acid out of it.
The work is distinguished by the old time Japanese simplicity of form. The execution is commendable enough, with soft slate or other understated hues to most of the compositions. Among these I would name the School & Untitled series as affording balm to city-sore eyes.
The painter’s work combines new methods with the spirit of suave, traditional art, and the results can be thus rewarding. There is hardly any work in the show which fails to elicit some interest. And this without being `modern’ or `traditional’.
Finally, over here is observed the beginning of a career prompted by the heart… that is say art… and if one wishes the painter anything, it is of course that his heart remains sound; that his health of spirit stands by him till the last. Admittedly a difficult proposition in these times. But what else can we humans do but strongly wish!
Keshav Malik
(An Eminent Art Critic)
New Delhi, India
शुक्रवार, 18 नवंबर 2011
Ashok Kumar in International Biennale Artist Exhibition
कला एवं शिल्प महाविद्द्यालय , पटना से स्नातक अशोक कुमार कला की राजनीति से दूर अपनी अलग पहचान बनाने वाले कर्मठ कलाकारों में शामिल है / अशोक कुमार एक ऐसा नाम है जिनकी कला केवल भारत वर्ष में ही नहीं बल्कि देश के बहार भी काफी सराही गई है / यही कारण है कि आज उनकी कृति (पेन्टिंग) को LuminArte Gallery द्वारा आयोजित International Biennale Artist Exhibitaon में भारत का प्रतिनिधित्व करने का मौका मिला है / 5 नवम्बर से शुरू इस प्रदर्शनी में 17 देशों के 42 समसामयिक कलाकारों को चुना गया है / इस प्रदर्शनी में भारत के अलावा ऑस्ट्रिया , कनाडा, चीन, कोलम्बिया, फिनलैण्ड, इरान, इसराइल, लिथुआनिया, मैक्सिको, मोरक्को, पेरू, रोमानिया, स्वीडेन , टर्की , यु. एस. ए. तथा वेनेजुएला के कलाकारों को अपनी कला का प्रदर्शन करने का मौका मिला है / यह प्रदर्शनी 11 दिसंबर तक LuminArt FineArt Gallery 1727 E Levee St, Dallas ,Tx में चलेगी / 

मंगलवार, 8 नवंबर 2011
| पावापुरी यात्रा |
पटना ८ नवम्बर २०११,
बिहार लालित कला अकादमी एवं कला संस्कृति एवं युवा विभाग, बिहार सरकार के सौजन्य से आयोजित अखिल भारतीय कलाकार शिविर २०११ का आज चौथा दिन है / शिविर के कार्यक्रम के अनुसार देश के विभिन्न राज्यों से आए २५ कलाकार अपनी दो दिवसीय बिहार भ्रमण के बाद ७ नवम्बर को पटना वापस लौट आए / कलाकारों को सबसे पहले भगवन महावीर के निर्वान स्थल पावापुरी का दर्शन कराया गया , उसके बाद नालंदा होते हुए राजगीर में रात्रि विश्राम के बाद अगले दिन सुबह वहा के विभिन्न धार्मिक एवं ऐतिहासिक स्थलों का भी अवलोकन कलाकारों को कराया गया / राज्य के बहार से आए कलाकारों ने राजगीर के वीरायतन की झाकियों एवं वहा की खुबसूरत पहाड़ी नजरो को देख अचंभित रह गए / उन्हें यह भी कहते सुना गया कि बिहार की इतनी समृद्ध है इस बात का पता उन्हें पहले नहीं था लेकिन अब उन्हें यहाँ बार-बार आने की इक्षा है / राजगीर में घूमने के बाद कलाकारों को बोध गया के भी दर्शन करे गए / इन सभी जगहों को देखने एवं अपने कैमरे में कैद करने के बाद रात १० बजे पटना वापस लौट आए /
| बोधगया |
यात्रा के दौरान सुरक्षित किए गए विभिन्न जानकारियों के साथ कलाकारों ने अपने मनोभावों को कैनवास पर उकेरने का काम फ्रेज़र रोड स्थित बहुउद्देशीय सांस्कृतिक परिसर में आज से प्रारंभ कर दिया / सभी कलाकार अगले चार दिनों तक यही रह कर कला सृजन करेंगे / इन कलाकृतियों की प्रदर्शनी ११ एवं १२ नवम्बर को किया जाएगा /
शनिवार, 29 अक्टूबर 2011
अरुण पंडित की एकल कला प्रदर्शनी
जैसा की मैंने पहले भी कहा है अन्य राज्यों की तरह बिहार के भी कई कलाकार राज्य से बहार रह कर कला की सेवा में सदैव तत्पर है , जिन्होंने पूरे देश में अपने काम का लोहा मनवाया है / चाक्षुष कला के क्षेत्र में अरुण पंडित एक ऐसा ही नाम है / आज अरुण कला की दुनिया का एक जाना-पहचाना नाम है जिन्होंने दिल्ली को अपनी कर्म भूमि बना बड़े ही लगन से काम कर रहे है /
आज से अरुण पंडित की तीन दिनों तक चलने वाली एकल कला प्रदर्शनी का शुभारम्भ दिल्ली के इंडिया हैबिटेट सेंटर की विजुअल आर्ट गैलरी में हुआ / इस प्रदर्शनी में अरुण की मूर्तियों के साथ-साथ उनकी पेंटिंग तथा ड्राइंग भी प्रदर्शित है /
इन्ही कृतिओ का पुनर्प्रदर्शन होटल फोर्च्यून पार्क DJ एवेन्यु, घिटोरनी, नई दिल्ली में १ नवम्बर से ५ नवम्बर , २०११ तक किया जायेगा /
गुरुवार, 27 अक्टूबर 2011
अखिल भारतीय चित्रकला शिविर
अखिल भारतीय चित्रकला शिविर
५ से ११ नवम्बर २०११
स्थान - सांस्कृतिक परिसर
भारतीय नृत्य कला मंदिर
फ्रेज़र रोड , पटना
बिहार ललित कला अकादमी द्वारा आयोजित इस शिविर में देश के विभिन्न शहरों यथा - वाराणसी , नई दिल्ली , बडौदा , मुंबई, भुवनेश्वर, पटना, महाराष्ट्र , कोलकाता, आदि से पच्चीस चित्रकार आएँगे और अपनी- अपनी कल्पनाशीलता के अनुसार चित्रों का सृजन करेंगे / विदित हो कि रचना करने के पूर्व सरे चित्रकारों को बिहार के कई सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक स्थलों का भ्रमण कराया जाएगा ताकि उनकी कलाकृतियो में इसकी खुशबू आ सके / अक्सर ऐसा होता है कि चित्रकार किसी शिविर में चित्र सृजित करने के लिए जाते है तो वे अपनी पूर्व श्रृंखला स सम्बंधित ही रचना करते है लेकिन इस कार्यशाला में चित्रकारों कि कार्यशैली अपनी होगी लेकिन विषय की केन्द्रीयता बिहार की संस्कृति होगी / ऐसे में संभव है की रंग-रोगन भी उसी परिदृष्य या माहौल को रेखांकित करेंगे / कलात्मक माहौल का निर्माण होगा ऐसा अनुमान किया जा सकता है / यह अच्छा अवसर होगा जब पच्चीस कलाकार एक जगह बैठ कर अपने-अपने चित्रों - आकृतियों को जन्म देंगे / इस दौरान हम रचना प्रक्रिया को करीब स महसूस कर सकते है / चित्र सृजन के अलावे कला के विभिन्न पहलुओ पर बात-चीत तो होगी ही लगभग हर दिन कलाकारों की कलाकृतियो का स्लाइड शो भी होगा / शिविर में उपस्थित होने वाले चित्रकारों में श्री बिरेश्वर भट्टाचार्य, एस प्रणाम सिंह, मानस जेना, सुरेन्द्र जगताप, ज़ेबा हसन, एस एन लाहिरी, मिलन दास, अनिल सिन्हा, अनिल बिहारी, डा मंजू प्रसाद , राजेश चन्द, भुनेश्वर भास्कर, मनोज बच्चन, अशोक कुमार, अंजनी प्रसाद, सत्रुघन ठाकुर, रविन्द्र दास, त्रिभुवन देव, राजीव रंजन, शैलेन्द्र कुमार, अजय चौधरी, राजू कुमार, चन्दन चौधरी, , बिरेन्द्र कुमार सिंह, प्रो श्याम शर्मा है / इस कार्यक्रम के संयोजक वरिष्ठ छपा कलाकार श्री श्याम शर्मा तथा सह संयोजक बिरेन्द्र कुमार सिंह है /
सामूहिक कला प्रदर्शनी
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| Group Show, Ragini Sinha and Shrikant Pandey and Others |
कला के क्षेत्र में बिहार का नाम सदियों से बड़े ही सम्मान के साथ लिया जाता रहा है / हाल के कुछ वर्षो में यहाँ के कई कलाकारों ने कला के विभिन्न क्षेत्रो में राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त कर बिहार का नाम रौशन किया है /
बिहार के कई ऐसे कलाकार है जो राजधानी दिल्ली में रह कर कला सृजन कर रहे है साथ ही प्रदर्शनियों द्वारा कला प्रेमियों का दिल जीत रहे है / इसी क्रम में आज दिनांक २७/१०/२०११ को राष्ट्रीय ललित कला अकादेमी कला दीर्घा , नई दिल्ली में बिहार के तीन कलाकारों कि कला प्रदर्शनी का शुभारम्भ हुआ / अकादेमी कि दीर्घा संख्या - ७ एवं ८ में आयोजित सामूहिक प्रदर्शनी में महिला चित्रकार रागिनी सिन्हा के तीन चित्र प्रदर्शित है साथ ही श्रीकांत पाण्डेय कि संगेमरमर में तरसी दो मूर्तिशिल्प प्रदर्शित है / इनके अलावा ३० अन्य कलाकार भी इस प्रदर्शनी का हिस्सा है , जिनमे आरती जवेरी , हर्ष वर्धन शर्मा, जय झरोटिया, कंचन चंदर,मुक्ता गुप्ता, विजेंद्र शर्मा प्रमुख है / इस प्रदर्शनी के संयोजक श्री राजन के पुरोहित है जिन्होंने हाल ही में कई बड़े शो किये है /
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| Solo Show, Vipul Kumar |
इसी दीर्घा के स्कल्पचर कोर्ट में विपुल कुमार की सिरामिक से बनी एब्स्ट्रैक्ट मूर्ति शिल्प की एकल प्रदर्शनी आकर्षण का केंद्र है / विपुल ने बड़े ही आकर्षक ढंग से सिरामिक माध्यम में मुर्तिया गढ़ी है जो उनके हुनर की पराकाष्ठा को दिखता है /यह दोनों प्रदर्शनी २ नवम्बर २०११ तक चलेगी /
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| Solo Show, Vipul Kumar |
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